Electrical Power Plan of INDIA

Updated: Apr 21, 2020

बिजली उत्पादन के सभी संभव स्त्रोतों की महत्ता एवं सीमाओं को मद्देनजर रखते हुए, भारत ने दूर दराज के क्षेत्रों वाले परिवारों में भी प्रकाश करने एवं भारत के चहुँमुखी विकास के लिए आवश्यक बिजली का उत्पादन करने के लिए वर्ष 2004 में एक योजना बनाई है।इस योजना के मुताबिक भारत को प्रतिव्यक्ति प्रतिवर्ष, 2000 यूनिट परमाणु ऊर्जा से, 1300 यूनिट सौर ऊर्जा से, 250-250 यूनिट जल एवं पवन से, 1000 यूनिट कोयले से व 300 यूनिट बाकि के अन्य स्त्रोतों से बनाना निश्चित किया गया।परमाणु ऊर्जा के अतिरिक्त, भारत अन्य किसी भी स्त्रोत से इन दरों से ज्यादा बिजली पैदा कर ही नहीं सकता है।भारत में सौर ऊर्जा से बिजली बनाने और परमाणु ऊर्जा से बिजली बनाने के सन्दर्भ में आम से लेकर खास जन की यह धारणा बनी हुई है और बना भी दी गयी है कि, सौर ऊर्जा से तो हम जब चाहें जितनी बिजली बना लेंगे और इसको बनाने में न तो किसी प्रकार कोई खतरा है और सौर पावर प्लांट्स बनाने में अपेक्षाकृत कम खर्चा आता है। अतः, परमाणु ऊर्जा से बिजली क्यों बनाने की वकालत करें; जबकि, परमाणु ऊर्जा से बिजली बनाने वाले परमाणु बिजलीघरों से विशाल मात्रा में जनलेवा हानिकारक विकिरणों का उत्सर्जन होता है, परमाणु बिजलीघर बम की तरह फट सकते हैं, परमाणु ऊर्जा से बिजली बनाना बहुत महंगा है, भारत के पास परमाणु ईंधन है ही नहीं, परमाणु ऊर्जा से बिजली बनाने के लिए हमें अमेरिका, फ्रांस, रूस इत्यादि देशों की मदद लेनी पड़ती है, इत्यादि-इत्यादि। यदि यह सोच वास्तविक रूप से यथार्थ होती, सच होती तो बहुत अच्छा था, कोई मतभेद ही नहीं होता। लेकिन वास्तविकताएं पूर्णतः भिन्न हैं।





Comments